
न्यायालय जिला न्यायाधीश रायपुर, छत्तीसगढ़ पीठासीन न्यायाधीश श्रीमान नीलम चाँद सांखला व्यवहार वाद क्रमांक – 167 A / 2014 संस्थित दिनांक 14/11/2014 आदेश दिनांक 20/02/2018 में पंजीयक सार्वजनिक न्यास रायपुर छ.ग. को श्री ठाकुर रामचंद्र स्वामी नागरीदास मंदिर सार्वजनिक न्यास, पंजीयन क्रमांक 91 में नए ट्रस्ट गठन का आदेश दिया गया है l जिसकी अपील माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में FAM No. 63 / 2018 में कि गई l इसमें आदेश दिनांक 08/05/2025 को जिला न्यायालय के आदेश दिनांक 20/02/2018 को मान्य करते हुए अपील को खारिज किया गया और नए ट्रस्ट का गठन करने को कहा l नए ट्रस्ट के गठन तक पंजीयक सार्वजनिक न्यास रायपुर को श्री ठाकुर रामचंद्र स्वामी नागरीदास ,मंदिर सार्वजनिक न्यास पंजीयन क्रमांक 91 में रिसीवर नियुक्त करने को कहा गया l पंजीयक सार्वजनकि न्यास रायपुर द्वारा आदेश क्रमांक 318/वाचक – 2/अ.वि.अ./18 रायपुर दिनांक 22/03/2018 के द्वारा अतिरिक्त तहसीलदार रायपुर श्री उमेश कुमार साहू को संदर्भित न्यास का रिसीवर नियुक्त किया गया l इसके पश्चात् तात्कालिक तहसीलदारों को आज दिनांक तक संदर्भित न्यास का रिसीवर पंजीयक सार्वजनिक न्यास रायपुर द्वारा नियुक्त किया जाता रहा है –
श्रीमान हरिओम दवेदी, मनीष देव साहू, अजय कुमार चंद्रवंशी, पवन कोसमा, राममूर्ति दीवान वर्तमान में तहसीलदार रायपुर हैं l

लेकिन यहीं से खेल शुरू हुआ l अधिकारीयों ने खुद के पावर को सत्यनारायण शर्मा को सौंप दिया और जिस ट्रस्ट के संचालन का काम माननीय उच्च न्यायलय और जिला न्यायालय ने पंजीयक सार्वजनिक न्यास को सौंपा था उसे अनुविभागीय अधिकारी एवं पंजीयक सार्वजनिक न्यास और तहसीलदार रायपुर ने बिना अधिकार के अपने कर्तव्यों का निर्वहन विधि विरुद्ध तरीके से सत्यनारायण शर्मा, पूर्व कांग्रेसी विधायक को लाभ पहुंचाने के लिए उन्हें अपने सारे अधिकार हस्तांतरित कर दिए l सत्यनारायण शर्मा तहसीलदार का ट्रस्ट से सम्बंधित ऑफिस खुद चला रहे है l सत्यनारायण शर्मा नोटशीट बनाते हैं और तहसीलदार रायपुर उस पर और बैंको के चेक पर हस्ताक्षर करते हैं l मतलब रायपुर तहसीलदार, सत्यनारायण शर्मा के हाथों की कठपुतली बन गए हैं l
आज श्री ठाकुर रामचंद्र स्वामी नागरीदास, मंदिर सार्वजनिक न्यास पंजीयन क्रमांक 91 के 9 बैंकों में खाते हैं l ट्रस्ट के खर्चों की ऑडिट रिपोर्ट भी नियम विरुद्ध तरीके से तहसीलदार रायपुर की जगह सत्यनारायण शर्मा ही बना रहे हैं l
जैतूसाव मठ मैं जो लोग न्यासी नहीं हैं वो ही मिलकर न्यास का संचालन कर रहे हैं l इस न्यास में भी सत्यनारायण शर्मा अन्य लोगों से मिलकर बिना अधिकार के जैतूसाव मठ की जमीन को बिना अधिकार के एक बिल्डर को बेच कर उसके एवज में 62 लाख रूपये ले लिया गया चेक से और स्वाभाविक रूप से अनेकों विधि विरुद्ध कार्य इनके दवारा किया जा रहे हैं l
क्या सभी कार्य रायपुर SDM एवं तहसीलदार रायपुर के सहयोग से हो रहे हैं इसकी जाँच की जाए ? जब जांच सही तरीके से होगी तो 300 साल पुराने आस्था के प्रतीक हिन्दू धर्मों के मठों को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है l

